पटना/नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले, ‘जन सुराज’ अभियान के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) एक बड़े विवाद में घिर गए हैं। चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने उन्हें दो अलग-अलग राज्यों की वोटर लिस्ट में नाम होने के मामले में नोटिस जारी कर दिया है, जिससे बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है।
चुनाव आयोग ने प्रशांत किशोर को 3 दिन के भीतर इस मामले पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है, जिसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में इस नोटिस के निहितार्थ (Implications) पर बहस छिड़ गई है। प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने इस नोटिस पर अपना पहला रिएक्शन भी दिया है, जिसे लेकर विवाद और बढ़ गया है।
क्या है यह पूरा मामला? चुनाव आयोग का नोटिस क्यों इतना गंभीर है? और बिहार चुनाव 2025 में ‘जन सुराज’ के राजनीतिक भविष्य पर इसका क्या असर पड़ सकता है? आइए, इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं पूरे विवाद की Inside Story।
1. मामला क्या है? चुनाव आयोग ने क्यों भेजा नोटिस?
(मुख्य समस्या और कानूनी पहलू)
पूरे विवाद का केंद्र प्रशांत किशोर का नाम दो राज्यों की मतदाता सूची में दर्ज होना है:
- बिहार (गृह क्षेत्र): उनका नाम बिहार के रोहतास जिले की करगहर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज है।
- पश्चिम बंगाल (पेशेवर क्षेत्र): रिपोर्टों के अनुसार, उनका नाम पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट में भी है, जिसे उन्होंने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान टीएमसी के राजनीतिक सलाहकार के रूप में काम करते समय बनवाया था।
कानूनी पेंच: भारतीय निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, कोई भी नागरिक एक ही समय में दो अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूची में पंजीकृत (Registered) नहीं हो सकता। यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) का उल्लंघन माना जाता है। इसी आधार पर, करगहर विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें नोटिस भेजा है।
2. नोटिस पर प्रशांत किशोर का पहला रिएक्शन
प्रशांत किशोर ने इस नोटिस पर तुरंत प्रतिक्रिया दी है, जिसे उनके विरोधियों ने गैर-ज़िम्मेदाराना बताया है।
- PK का तर्क: उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह 2019 से बिहार के करगहर विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं। जब वह दो साल के लिए कोलकाता में थे, तब उन्होंने वहां अपना वोटर आईडी बनवाया था, लेकिन 2021 से उनका वोटर आईडी केवल करगहर का है।
- चुनाव आयोग पर पलटवार: PK ने सवाल उठाया है कि अगर उनका नाम वास्तव में दो जगहों पर है, तो निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए विशेष सघन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के बाद उनका नाम पश्चिम बंगाल की सूची से क्यों नहीं हटाया गया?
प्रशांत किशोर का बयान: “मैं 2019 से करगहर का वोटर हूँ। ECI अगर कह रहा है कि मेरा नाम दूसरी जगह भी है, तो SIR करके क्यों सबको परेशान कर रहे थे? इस नोटिस का कोई खास मतलब नहीं है।”
3. बिहार चुनाव 2025 पर राजनीतिक प्रभाव
प्रशांत किशोर, जो खुद को एक गैर-राजनीतिक सूत्रधार बताते हुए बिहार में ‘जन सुराज’ अभियान चला रहे हैं, के लिए यह विवाद कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
| राजनीतिक परिणाम | संभावित असर |
| विपक्षी हमला (NDA) | NDA (BJP+JDU) इस मुद्दे को PK पर हमले के लिए इस्तेमाल कर सकती है, यह दिखाने के लिए कि वह बिहार के नहीं बल्कि ‘बाहरी’ राजनीतिक खिलाड़ी हैं। |
| जन सुराज की विश्वसनीयता | जन सुराज एक वैकल्पिक राजनीति की बात करता है। इस तरह के कानूनी और नैतिक विवाद उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठा सकते हैं। |
| तेजस्वी vs PK | RJD नेता तेजस्वी यादव पहले ही PK को “जंगल राज” की वापसी से जोड़ने के लिए हमला कर चुके हैं। यह विवाद तेजस्वी को PK पर और हमला करने का मौका देगा। |
4. आगे क्या? ECI की कानूनी कार्रवाई की संभावना
प्रशांत किशोर को 3 दिन के भीतर निर्वाचन अधिकारी को लिखित स्पष्टीकरण देना होगा।
- अगर जवाब संतोषजनक रहा: अगर वह यह साबित कर देते हैं कि उन्होंने पश्चिम बंगाल से अपना नाम हटाने के लिए विधिवत आवेदन किया था, तो मामला खत्म हो सकता है।
- अगर जवाब संतोषजनक नहीं रहा: निर्वाचन आयोग के पास उनके खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 (वोटर लिस्ट में गलत घोषणा करना) के तहत FIR दर्ज कराने या उनके नाम को किसी एक सूची से हटाने की कार्रवाई करने का विकल्प होगा।
विशेषज्ञों की राय: जानकारों का कहना है कि यह मामला भले ही राजनीतिक हो, लेकिन कानूनी रूप से ECI को इस पर कार्रवाई करनी होगी ताकि वोटर लिस्ट की पवित्रता (Sanctity) बनी रहे।
निष्कर्ष: सवालों के घेरे में ‘जन सुराज’
प्रशांत किशोर ने बार-बार कहा है कि वह 2025 का चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन ‘जन सुराज’ को एक राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करने में लगे हैं। ऐसे में, चुनाव से ठीक पहले ECI का यह नोटिस उनके अभियान के लिए एक बड़ा झटका है। अब देखना यह है कि वह अपने जवाब में क्या कानूनी आधार पेश करते हैं और बिहार की जनता उनके इस विवाद को किस नज़रिए से देखती है।