नई दिल्ली: सरकारी योजनाओं के सही लाभार्थियों तक लाभ पहुँचाना जितना बड़ा उद्देश्य होता है, उसमें धांधली की खबरें उतनी ही चौंकाने वाली होती हैं। महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ (जिसे आम बोलचाल की भाषा में ‘लाडकी बहिन योजना’ कहा जाता है) में एक बड़ा घोटाला सामने आया है।
सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, यह खुलासा हुआ है कि इस योजना में 12,431 पुरुष लाभार्थियों ने खुद को ‘महिला’ बताकर योजना का लाभ उठाया और हर महीने ₹1,500 की आर्थिक सहायता प्राप्त की। कुल मिलाकर, अपात्र लाभार्थियों (जिसमें पुरुष और अपात्र महिलाएँ शामिल हैं) को लगभग ₹164.52 करोड़ का गलत भुगतान हुआ है।
यह योजना, जिसका उद्देश्य 21 से 65 वर्ष की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है, अब बड़े पैमाने पर दुरुपयोग के कारण सुर्खियों में है। सरकार ने इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए अपात्र लोगों को सूची से हटा दिया है और अब बड़े स्तर पर ई-केवाईसी सत्यापन अभियान शुरू किया गया है ताकि भविष्य में ऐसी धांधली रोकी जा सके।
क्या है ‘लाडकी बहिन योजना’ और इसका उद्देश्य?
यह योजना महाराष्ट्र सरकार द्वारा शुरू की गई एक प्रमुख महिला कल्याण योजना है।
योजना का संक्षिप्त विवरण (Key Highlights)
| विशेषता (Feature) | विवरण (Details) |
| राज्य | महाराष्ट्र |
| योजना का नाम | मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना |
| लाभ | प्रत्येक पात्र महिला को ₹1,500 प्रति माह की आर्थिक सहायता (DBT के माध्यम से) |
| आयु सीमा | 21 वर्ष से 65 वर्ष |
| पारिवारिक आय सीमा | ₹2.5 लाख प्रति वर्ष से अधिक नहीं |
| मुख्य उद्देश्य | महिलाओं का स्वास्थ्य, पोषण और परिवार के फैसलों में उनकी निर्णायक भूमिका को मजबूत करना। |
RTI में हुआ चौंकाने वाला खुलासा: करोड़ों का नुकसान
आरटीआई के जवाब में महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) द्वारा दिए गए आंकड़े बताते हैं कि योजना को लॉन्च करने में जल्दबाजी और अपर्याप्त जाँच के कारण बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई।

घोटाले के मुख्य बिंदु
- पुरुष लाभार्थी: सत्यापन (Verification) के दौरान 12,431 पुरुषों को लाभार्थी पाया गया, जिन्होंने ‘महिला’ बनकर लाभ लिया। इन पुरुषों को लगभग 13 महीनों तक लाभ मिला।
- कुल गलत भुगतान: अपात्र पुरुषों और अपात्र महिलाओं (77,980) को मिलाकर कुल ₹164.52 करोड़ से अधिक का भुगतान गलत तरीके से किया गया।
- अन्य अनियमितताएँ:
- कई सरकारी कर्मचारी (लगभग 2400) भी अपात्र होते हुए भी योजना का लाभ ले रहे थे।
- कुछ लाभार्थी एक ही समय में कई सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे थे।
- कई घरों में दो से अधिक सदस्य लाभ प्राप्त कर रहे थे, जबकि नियम केवल ‘एक विवाहित और एक अविवाहित महिला’ को लाभ देने का है।
कार्रवाई:
जांच में दोषी पाए गए पुरुषों और अपात्र महिलाओं को लाभार्थी सूची से हटा दिया गया है। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक अपात्र लोगों से वसूली (Recovery) के संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
घोटाले के बाद सरकार का बड़ा कदम: ई-केवाईसी अनिवार्य
इस बड़े दुरुपयोग को रोकने और योजना में पारदर्शिता लाने के लिए, सरकार ने राज्यव्यापी ई-केवाईसी (e-KYC) सत्यापन अभियान शुरू किया है।
e-KYC क्यों है ज़रूरी?
- डेटा मिलान: ई-केवाईसी के माध्यम से आधार डेटा (नाम, जन्मतिथि) का बैंक खाते और निवास प्रमाण पत्र से सीधा मिलान किया जाता है।
- डुप्लीकेशन की समाप्ति: यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी व्यक्ति दो अलग-अलग योजनाओं या एक ही योजना में दो बार लाभ न ले सके।
- पारदर्शिता: अपात्र सरकारी कर्मचारियों और आयकरदाताओं को छाँटने में मदद मिलती है।
e-KYC कैसे करें? (पात्र लाभार्थियों के लिए)
पात्र महिलाएँ जो पहले से इस योजना का लाभ ले रही हैं या आवेदन करना चाहती हैं, उन्हें निम्नलिखित OTP-आधारित e-KYC प्रक्रिया पूरी करनी होगी:
- वेबसाइट: योजना की आधिकारिक वेबसाइट https://ladakibahin.maharashtra.gov.in/ पर जाएं।
- e-KYC लिंक: होमपेज पर e-KYC या ‘मुख्यमंत्री Ladki Bahin Yojana e-KYC प्रक्रिया’ लिंक पर क्लिक करें।
- आधार सत्यापन: अपना आधार नंबर और कैप्चा कोड दर्ज करें।
- OTP: सहमति (I Agree) पर क्लिक करें और ‘Send OTP’ दबाएं। आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर पर प्राप्त OTP को दर्ज करें।
- अंतिम सबमिशन: OTP के सफलतापूर्वक सत्यापन के बाद, आपकी e-KYC प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
पात्रता मानदंड: लाभ जारी रखने के लिए क्या है अनिवार्य?
अपात्र पाए जाने से बचने के लिए, सभी मौजूदा और नए आवेदकों को निम्नलिखित मानदंड पूरे करने होंगे:
| पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria) | विवरण (Details) |
| निवासी | आवेदक महाराष्ट्र का स्थायी निवासी होना चाहिए। |
| लिंग और आयु | आवेदक महिला हो, और आयु 21 से 65 वर्ष के बीच हो। |
| पारिवारिक आय | परिवार की वार्षिक आय ₹2.5 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। |
| अन्य अपात्रता | परिवार का कोई सदस्य आयकरदाता, नियमित सरकारी कर्मचारी, सांसद/विधायक या ₹1,500 का लाभ किसी अन्य योजना से प्राप्त करने वाला न हो। |
| खाता अनिवार्यता | आवेदक का अपना व्यक्तिगत बैंक खाता आधार से लिंक (Aadhaar-linked) होना चाहिए। |
निष्कर्ष
‘लाडकी बहिन योजना’ में हुआ करोड़ों का यह घोटाला सरकारी योजनाओं की डेटा सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े करता है। हालांकि सरकार ने तुरंत कार्रवाई की है, लेकिन ₹164 करोड़ का गलत भुगतान होना चिंताजनक है।
पात्र महिलाओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे बिना किसी देरी के अपना e-KYC पूरा करें, ताकि उनकी मासिक ₹1,500 की सहायता राशि बिना किसी रुकावट के उनके खाते में आती रहे। यह घोटाला यह भी बताता है कि सरकार को भविष्य में लाभ जारी करने से पहले आधार और आयकर डेटा को और सख्ती से जाँचने की आवश्यकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
| प्रश्न (Question) | उत्तर (Answer) |
| प्रश्न 1: योजना में कितने पुरुषों ने लाभ लिया? | RTI के अनुसार, लगभग 12,431 पुरुषों ने महिला बनकर योजना का लाभ लिया। |
| प्रश्न 2: क्या अपात्र लाभार्थियों से वसूली होगी? | अभी तक वसूली के संबंध में कोई अंतिम सरकारी निर्णय नहीं लिया गया है। |
| प्रश्न 3: e-KYC किसके लिए अनिवार्य है? | योजना का लाभ जारी रखने के लिए सभी वर्तमान और नए लाभार्थियों के लिए e-KYC अनिवार्य है। |
| प्रश्न 4: ₹1,500 की किस्त कब से मिल रही है? | इस योजना का लाभ जून 2024 से मिलना शुरू हुआ था। |
1 thought on “लाडकी बहिन योजना में ₹164 करोड़ का घोटाला! 12,431 पुरुषों ने उठाया लाभ, अब e-KYC अनिवार्य”