Gold Silver Price: त्योहारी सीज़न (Festive Season) के उत्साह के बीच, जहाँ भारतीय बाज़ार धनतेरस की खरीदारी से गुलजार थे, वहीं अचानक सोने और चांदी की कीमतों पर ब्रेक लग गया। रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँचने के बाद, इन कीमती धातुओं की कीमतों में एक ऐसी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले चार सालों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।
अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में सोने की कीमतें अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर $4,381 प्रति औंस से तेज़ी से फिसलकर $4,200 के करीब आ गईं, जिससे घरेलू बाज़ार (Domestic Market) में भी 24 कैरेट सोने का भाव (MCX पर) ₹1,32,000 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर से फिसलकर ₹1,26,000 के आसपास आ गया। चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई।
आखिर क्या कारण है कि जब निवेशकों को सोने से और उछाल की उम्मीद थी, तब बाज़ार में इतना बड़ा करेक्शन (Correction) देखने को मिला? आइए, इस अचानक गिरावट के पीछे के कारणों और निवेशकों के लिए आगे की रणनीति को समझते हैं।
सोने-चांदी की ऐतिहासिक गिरावट: मुख्य कारण
सोने और चांदी की कीमतों में यह तीव्र गिरावट किसी एक कारण से नहीं, बल्कि वैश्विक बाज़ारों में हुए कुछ महत्वपूर्ण बदलावों का परिणाम है।
1. मुनाफ़ा वसूली (Profit-Booking)
सोना इस साल की शुरुआत से ही 60% से अधिक बढ़ चुका था और कई बार नए रिकॉर्ड बना चुका था। जब कीमतें इतनी ऊँची हो जाती हैं, तो निवेशक अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बड़ी मात्रा में बिकवाली (Sell-off) शुरू कर देते हैं। यही ‘मुनाफ़ा वसूली’ इस बड़ी गिरावट का तात्कालिक और सबसे बड़ा कारण बनी।
2. डॉलर का मज़बूत होना (Stronger US Dollar)
सोने का व्यापार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी डॉलर में होता है। जब अमेरिकी डॉलर सूचकांक (U.S. Dollar Index) मज़बूत होता है, तो सोना उन निवेशकों के लिए महंगा हो जाता है जो दूसरी मुद्राओं (Currencies) में खरीदते हैं। डॉलर की मजबूती के कारण सोने की मांग घटी, जिससे कीमतों पर दबाव पड़ा।
3. भू-राजनीतिक तनाव में कमी (Easing Geopolitical Tensions)
सोना एक ‘सुरक्षित निवेश’ (Safe-Haven Asset) माना जाता है। जब भी दुनिया में राजनीतिक या आर्थिक अस्थिरता बढ़ती है (जैसे व्यापार युद्ध, युद्ध की आशंका), निवेशक सुरक्षित ठिकाने के रूप में सोने में पैसा लगाते हैं। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार वार्ताओं में नरमी और कुछ अन्य अंतर्राष्ट्रीय विवादों में शांति की उम्मीद से निवेशकों ने सोने से पैसा निकालकर शेयर बाज़ार (Equities) जैसे ‘जोखिम भरे’ (Riskier) एसेट में लगाना शुरू कर दिया।
4. तकनीकी करेक्शन (Technical Correction)
तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) के अनुसार, सोना अपने रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) जैसे संकेतकों पर ‘अति-खरीद’ (Overbought) क्षेत्र में पहुँच गया था। इस स्तर से बाज़ार का गिरना स्वस्थ और आवश्यक करेक्शन माना जाता है।
| गिरावट का कारण | बाज़ार पर प्रभाव | निष्कर्ष |
| मुनाफ़ा वसूली | रिकॉर्ड हाई के बाद बिकवाली का भारी दबाव। | तात्कालिक गिरावट का सबसे बड़ा कारण। |
| मज़बूत अमेरिकी डॉलर | अन्य मुद्राओं के खरीदारों के लिए सोना महंगा हुआ, मांग घटी। | अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार का दबाव। |
| तनाव में कमी | निवेशकों ने सोने से पैसा निकालकर जोखिम वाले एसेट में लगाया। | ‘सुरक्षित निवेश’ की मांग में अस्थायी कमी। |
| बढ़ी हुई वोलैटिलिटी | बाज़ार में अस्थिरता बढ़ी, जिसने शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को बिकवाली के लिए प्रेरित किया। | अल्पकालिक (Short-term) ट्रेडर्स का बाहर निकलना। |
क्या आगे और गिरेगा सोना? विशेषज्ञों की राय
इस बड़ी गिरावट ने आम निवेशकों के मन में यह सवाल पैदा कर दिया है कि क्या अब सोने का ‘बुल रन’ (तेजी का दौर) खत्म हो गया है? विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट एक स्वस्थ सुधार (Healthy Correction) है, और लंबी अवधि (Long Term) में सोने के मौलिक कारक (Fundamental Factors) अभी भी मज़बूत बने हुए हैं।
सोने के पक्ष में मज़बूत कारक (Factors Supporting Gold Price)
- ब्याज दर में कटौती की उम्मीद (Rate Cut Expectations): अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद अभी भी बाज़ार में बनी हुई है। ब्याज दरें कम होने पर बॉन्ड्स पर रिटर्न कम मिलता है, जिससे सोना (जो कोई ब्याज नहीं देता) निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो जाता है।
- केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: दुनिया भर के केंद्रीय बैंक (Central Banks), खासकर भारत और चीन, लगातार अपने सोने के भंडार (Gold Reserves) को बढ़ा रहे हैं। यह संस्थागत मांग सोने की कीमतों को एक मज़बूत आधार प्रदान करती है।
- मुद्रास्फीति (Inflation) से बचाव: दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति का खतरा अभी भी बरकरार है। सोना पारंपरिक रूप से मुद्रास्फीति के खिलाफ एक बेहतरीन बचाव (Hedge) के रूप में कार्य करता है।
- डॉलर पर अविश्वास (De-dollarization): कई देश अपने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम कर रहे हैं, जो लंबी अवधि में सोने की मांग और कीमत को समर्थन देगा।
विशेषज्ञ सलाह (Motilal Oswal): कमोडिटी विशेषज्ञ मानते हैं कि यह गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए खरीदने का एक अच्छा अवसर (Buying Opportunity) हो सकता है। $4,250 प्रति औंस या घरेलू बाज़ार में ₹1,25,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास सोना मज़बूत समर्थन पा सकता है।
चांदी का हाल: औद्योगिक मांग का बड़ा खेल
चांदी (Silver) में गिरावट सोने की तुलना में अधिक तीव्र रही, क्योंकि चांदी की दोहरी प्रकृति होती है। यह एक कीमती धातु होने के साथ-साथ सौर ऊर्जा (Solar Energy) और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर उपयोग होती है।
- औद्योगिक मांग का असर: अगर वैश्विक विकास (Global Growth) या चीन की औद्योगिक मांग में थोड़ी भी कमी आती है, तो चांदी की कीमतों पर सीधा और तेज असर पड़ता है।
- उच्च बीटा (Higher Beta): चांदी को सोने की तुलना में उच्च बीटा एसेट माना जाता है, जिसका अर्थ है कि जब बाज़ार बढ़ता है तो यह तेज़ी से बढ़ती है, और जब गिरता है तो तेज़ी से गिरती है।
निवेशकों के लिए आगे की रणनीति (Investment Strategy)
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को अपनी निवेश रणनीति को अपने लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार तय करना चाहिए।
1. लंबी अवधि के निवेशक (Long-Term Investors)
- SIP (Systematic Investment Plan): रिकॉर्ड हाई के बाद कीमतों का पीछा करने के बजाय, SIP या व्यवस्थित खरीद (Staged Buying) के माध्यम से सोना और चांदी जमा करें। गिरावट के हर स्तर (जैसे 5-10% गिरावट) पर थोड़ी-थोड़ी खरीदारी करना सबसे सुरक्षित तरीका है।
- Sovereign Gold Bonds (SGB): जो निवेशक फिजिकल सोना नहीं चाहते, उनके लिए SGB सबसे अच्छा विकल्प है, क्योंकि यह 2.5% अतिरिक्त ब्याज और परिपक्वता (Maturity) पर कर-मुक्त लाभ देता है।
2. त्योहारी खरीदार (Festive Buyers)
- ज़रूरत के हिसाब से खरीदें: धनतेरस और दिवाली पर सोना खरीदना सांस्कृतिक और शुभ माना जाता है। इस समय सोने को केवल ‘निवेश’ के रूप में न देखें, बल्कि अपनी ज़रूरत और संस्कृति के लिए खरीदें। मेकिंग चार्ज (Making Charges) के कारण ज्वैलरी को उच्च-लाभ वाला निवेश न मानें।
3. शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स
- स्टॉप-लॉस: तेज़ वोलैटिलिटी को देखते हुए, शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को सख्त स्टॉप-लॉस का उपयोग करना चाहिए और बड़े पदों (Large Positions) से बचना चाहिए।
निष्कर्ष
सोने और चांदी की कीमतों में 4 साल की यह सबसे बड़ी गिरावट एक गंभीर खतरे का संकेत नहीं, बल्कि एक बाज़ार सुधार की ओर इशारा करती है। बाज़ार विशेषज्ञ अभी भी लंबी अवधि में इन कीमती धातुओं के लिए आशावादी हैं। वैश्विक अनिश्चितता, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और ब्याज दरों में कटौती की आस अभी भी सोने के पक्ष में है। यह मौजूदा करेक्शन उन समझदार निवेशकों के लिए एक दुर्लभ अवसर हो सकता है जो लंबे समय से सोने में निवेश करने के लिए बेहतर स्तर का इंतजार कर रहे थे। बाज़ार की अस्थिरता से घबराएं नहीं, बल्कि इसे अवसर के रूप में देखें।
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