नमस्कार दोस्तों! क्या आप भी एक माता-पिता (Parent) हैं और अपने बच्चे के बढ़ते हुए ‘एग्जाम स्ट्रेस’ को लेकर चिंतित हैं? या आप एक छात्र हैं जो समझ नहीं पा रहे कि 10वीं या 12वीं के बाद कौन सा करियर चुनें?
अगर हाँ, तो केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने आपकी इस परेशानी को हमेशा के लिए खत्म करने का फैसला कर लिया है। बोर्ड ने सभी स्कूलों के लिए एक ऐतिहासिक और सख्त निर्देश जारी किया है। अब स्कूलों में सिर्फ पढ़ाई नहीं होगी, बल्कि बच्चों के ‘मन की बात’ सुनने वाला भी कोई होगा।
CBSE ने फैसला किया है कि अब हर मान्यता प्राप्त स्कूल को ‘करियर काउंसलर’ (Career Counselor) और ‘वेलनेस टीचर’ रखना अनिवार्य होगा। आइये विस्तार से जानते हैं कि यह नियम क्यों लाया गया और इससे आपके बच्चों को क्या फायदा होगा।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला? (Why this Decision?)
आजकल पढ़ाई का कम्पटीशन इतना बढ़ गया है कि छोटे-छोटे बच्चे डिप्रेशन और एंग्जायटी (Anxiety) का शिकार हो रहे हैं।
- बढ़ता तनाव: बोर्ड परीक्षाओं (10th/12th) के दौरान छात्रों पर अच्छे नंबर लाने का भारी दबाव होता है।
- करियर की उलझन: साइंस लें या कॉमर्स? इंजीनियरिंग करें या यूट्यूबर बनें? इन सवालों के जवाब देने वाला स्कूलों में कोई एक्सपर्ट नहीं होता था।
- मेंटल हेल्थ: हाल के दिनों में छात्रों द्वारा उठाए गए गलत कदमों (Suicide cases) को देखते हुए CBSE ने यह ‘Zero Tolerance’ वाली नीति अपनाई है।
नई गाइडलाइन में क्या है खास? (Key Highlights)
CBSE ने अपने एफिलिएटेड (Affiliated) सभी स्कूलों को सर्कुलर जारी कर दिया है:
- अनिवार्य नियुक्ति: अब यह स्कूलों की मर्जी पर नहीं है। उन्हें एक प्रोफेशनल काउंसलर रखना ही पड़ेगा।
- काउंसलिंग सेल: स्कूल के अंदर एक अलग कमरा या ‘काउंसलिंग सेल’ बनाना होगा जहाँ छात्र बेझिझक अपनी बात कह सकें।
- रेगुलर वर्कशॉप: सिर्फ बात करने से काम नहीं चलेगा, समय-समय पर करियर गाइडेंस की वर्कशॉप करानी होंगी।
एक नज़र में: CBSE का नया नियम (Summary Table)
| विवरण (Details) | जानकारी (Info) |
| बोर्ड | CBSE (Central Board of Secondary Education) |
| नया नियम | Career Counselor Mandatory |
| उद्देश्य | Academic Pressure & Stress Management |
| लागू होगा | तत्काल प्रभाव से (From Session 2026-27) |
| किसे फायदा? | Class 9th to 12th Students |
काउंसलर का काम क्या होगा? (Role of Counselor)
अब आप सोच रहे होंगे कि यह काउंसलर करेगा क्या? क्या यह कोई विषय पढ़ाएगा? जी नहीं।
- Psycho-Social Support: अगर बच्चा उदास है, डरा हुआ है या किसी पारिवारिक समस्या से जूझ रहा है, तो काउंसलर उसकी मदद करेगा।
- Career Mapping: छात्र की रुचि (Interest) और क्षमता (Aptitude) को देखकर उसे सही करियर का रास्ता दिखाएगा।
- Parent Counseling: कई बार दबाव माता-पिता की तरफ से होता है। ऐसे में काउंसलर पेरेंट्स को भी समझाएंगे कि बच्चे पर दबाव न डालें।
पेरेंट्स और स्कूलों के लिए एक्सपर्ट की सलाह
- स्कूलों के लिए: इसे सिर्फ एक ‘नियम’ मानकर खानापूर्ति न करें। एक अच्छा काउंसलर आपके स्कूल का रिजल्ट बेहतर कर सकता है।
- पेरेंट्स के लिए: अगर आपके स्कूल में अभी तक काउंसलर नहीं है, तो आप PTM (पैरेंट टीचर मीटिंग) में आवाज़ उठाएं और CBSE के इस सर्कुलर का हवाला दें।
Conclusion:
दोस्तों, पढ़ाई जरूरी है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) उससे भी ज्यादा जरूरी है। CBSE का यह कदम स्वागत योग्य है। उम्मीद है कि इससे बच्चों के कंधों से ‘बस्ते के बोझ’ के साथ-साथ ‘दिमाग का बोझ’ भी कम होगा।
(Note: अगर आपके मन में करियर को लेकर कोई सवाल है, तो हमारे Telegram ग्रुप में पूछें। वहां हमारे एक्सपर्ट्स आपकी मदद करेंगे।)