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RBI e-Rupee Offline Payment: बिना इंटरनेट कैसे काम करता है ‘डिजिटल कैश’? जानें e₹ वॉलेट उपयोग करने का पूरा तरीका

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के डिजिटल पेमेंट सिस्टम में एक और क्रांति ला दी है। UPI की शानदार सफलता के बाद, RBI ने अब अपनी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) यानी डिजिटल रुपया (e₹) को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है—जिसका नाम है ‘ऑफलाइन डिजिटल रुपया’

इस नए फीचर का सीधा मतलब है: आप अब बिना किसी इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी के भी तुरंत पेमेंट कर सकते हैं। RBI इसे “कैश, लेकिन डिजिटल” टैगलाइन के साथ प्रमोट कर रहा है।

यह फीचर उन लाखों लोगों के लिए गेम चेंजर साबित होगा जो ग्रामीण या दूर-दराज के इलाकों में रहते हैं, जहाँ इंटरनेट की कनेक्टिविटी एक बड़ी समस्या है। यहाँ जानें कि डिजिटल रुपया क्या है, ऑफलाइन पेमेंट कैसे काम करता है, और आप e₹ वॉलेट का उपयोग कैसे शुरू कर सकते हैं।

1. e₹ क्या है? (Low Competition: e-rupee vs UPI)

डिजिटल रुपया (e₹) भारतीय मुद्रा का डिजिटल रूप है, जिसे सीधे RBI द्वारा जारी किया जाता है। यह भौतिक नोटों और सिक्कों के समान ही एक कानूनी निविदा (Legal Tender) है।

विशेषताडिजिटल रुपया (e₹)UPI (Google Pay/Paytm)
जारीकर्तासीधे RBI (सेंट्रल बैंक)बैंक/थर्ड पार्टी ऐप्स
प्रकृतिडिजिटल कैश/टोकन (वॉलेट में स्टोर होता है)बैंक खाते के बीच लेनदेन प्रणाली
इंटरनेटबिना इंटरनेट के भी काम करता है (Offline)काम करने के लिए इंटरनेट अनिवार्य
सेटलमेंटतत्काल, कोई इंटरबैंक सेटलमेंट नहींबैंक सर्वर के माध्यम से सेटलमेंट
ब्याजकोई ब्याज नहीं मिलता (जैसे फिजिकल कैश)

2. e₹ Offline Payment: बिना इंटरनेट कैसे होती है पेमेंट?

यह सबसे अनूठी और कम समझी जाने वाली तकनीक है। RBI ने ऑफलाइन पेमेंट को संभव बनाने के लिए NFC (Near Field Communication) और Telecom-Assisted जैसी तकनीकों का उपयोग किया है।

भुगतान की प्रक्रिया (Low Competition: e-rupee NFC Payments)

  1. NFC टैप: यदि भेजने वाले (Sender) और प्राप्त करने वाले (Receiver) दोनों के डिवाइस NFC-सक्षम हैं, तो वे बस अपने फ़ोन को एक-दूसरे के पास ‘टैप’ करके तुरंत e₹ ट्रांसफर कर सकते हैं, ठीक जैसे आप फिजिकल कैश देते हैं। इसके लिए इंटरनेट की बिल्कुल आवश्यकता नहीं होती है।
  2. टेलीकॉम असिस्टेड: जिन इलाकों में बहुत कमजोर या सिर्फ न्यूनतम नेटवर्क सिग्नल हैं, वहाँ भी यह पेमेंट सिस्टम काम कर सकता है, क्योंकि यह केवल लेनदेन डेटा को प्रसारित (Transmit) करने के लिए न्यूनतम सिग्नल पर निर्भर करता है।
  3. वॉलेट-टू-वॉलेट: e₹ में, पैसा सीधे एक डिजिटल वॉलेट से दूसरे वॉलेट में जाता है। UPI की तरह यह हर लेनदेन के लिए बैंक सर्वर से कनेक्ट होने की प्रतीक्षा नहीं करता, इसलिए यह कैश जितना ही तेज़ होता है।

3. e₹ वॉलेट उपयोग करने का पूरा तरीका (e₹ Wallet Registration Guide)

e₹ का उपयोग करने के लिए, आपको RBI के पायलट प्रोग्राम में शामिल बैंकों द्वारा प्रदान किए गए डिजिटल वॉलेट ऐप का उपयोग करना होगा।

e₹ Wallet को शुरू करने के चरण (Low Competition: Digital Rupee App Download)

  1. ऐप डाउनलोड: अपने बैंक (जैसे SBI, ICICI Bank, HDFC Bank, आदि) के Digital Rupee Wallet App को Google Play Store या Apple App Store से डाउनलोड करें। (पायलट में वर्तमान में 15 बैंक शामिल हैं)।
  2. रजिस्ट्रेशन: ऐप में अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और अपने बैंक खाते को लिंक करें। यह प्रक्रिया OTP और KYC सत्यापन पर आधारित होगी।
  3. e₹ लोड करें: एक बार रजिस्ट्रेशन होने के बाद, आप अपने बैंक खाते या UPI ऐप का उपयोग करके अपने डिजिटल वॉलेट में e₹ लोड (Add Funds) कर सकते हैं। यह प्रक्रिया फिजिकल कैश निकालने जितनी ही है।
  4. भुगतान (P2M): दुकानदारों को पेमेंट करने के लिए, आप उनके e₹ QR कोड को स्कैन कर सकते हैं, या यदि दोनों डिवाइस NFC-सक्षम हैं, तो टैप करके भी पेमेंट कर सकते हैं।

ध्यान दें: e₹ वॉलेट में ₹1 लाख तक का बैलेंस रखा जा सकता है, और यह गुम हो जाने पर भी सुरक्षित रहता है, क्योंकि इसे वापस पाया जा सकता है (Recovery Mechanism मौजूद है)।

4. CBDC: भारत को क्या लाभ? (High Value: CBDC Benefits India)

RBI ने इस तकनीक को UPI से मुकाबला करने के लिए नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को मजबूत करने के लिए लॉन्च किया है।

  • वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion): दूर-दराज के क्षेत्रों में, जहाँ बैंकिंग पहुँच कम है, वहाँ यह डिजिटल कैश लाखों लोगों को बिना किसी जटिल प्रक्रिया के डिजिटल लेनदेन की सुविधा देता है।
  • सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता: e₹ में प्रोग्रामेबिलिटी (Programmability) की सुविधा है। इसका मतलब है कि सरकार किसी सब्सिडी या सहायता राशि पर यह शर्त लगा सकती है कि पैसा कहाँ और कब खर्च किया जा सकता है (उदाहरण: केवल कृषि उपकरण पर खर्च हो)। इससे भ्रष्टाचार और रिसाव (Leakage) खत्म होता है।
  • नकदी प्रबंधन लागत में कमी: नकदी (Physical Cash) के मुद्रण, परिवहन और भंडारण की लागत बहुत अधिक होती है (GDP का लगभग 0.5%)। e₹ इस लागत को काफी हद तक कम कर सकता है।

निष्कर्ष: UPI से आगे, कैश से बेहतर

RBI का ऑफलाइन डिजिटल रुपया केवल एक नया पेमेंट मोड नहीं है, बल्कि यह भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल करता है जिन्होंने CBDC को सफलतापूर्वक जमीन पर उतारा है। यह UPI के ऑनलाइन प्रभुत्व को ऑफलाइन सुविधा देकर पूरक (Complement) बनाता है। यह “डिजिटल कैश” ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं और लक्षित सरकारी योजनाओं को अभूतपूर्व पारदर्शिता और दक्षता (Efficiency) प्रदान करने की क्षमता रखता है। डिजिटल भुगतान का भविष्य अब इंटरनेट की सीमाओं से परे है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या e₹ इस्तेमाल करने के लिए बैंक खाता अनिवार्य है?

नहीं। e₹ डिजिटल कैश की तरह काम करता है, इसलिए प्रत्येक लेनदेन के लिए बैंक खाते की आवश्यकता नहीं होती है।

प्रश्न 2: क्या मैं e₹ वॉलेट से UPI QR कोड स्कैन कर सकता हूँ?

हाँ। RBI ने e₹ को UPI QR कोड के साथ इंटरऑपरेबल बनाया है।

प्रश्न 3: क्या मुझे e₹ पर ब्याज मिलेगा?

नहीं। फिजिकल कैश की तरह e₹ पर भी कोई ब्याज नहीं मिलता है, ताकि लोग बैंकों से पैसा न निकालें।

प्रश्न 4: प्रोग्रामेबिलिटी क्या है?

यह वह सुविधा है जिससे पैसा केवल विशिष्ट उद्देश्यों (जैसे सब्सिडी) के लिए ही खर्च किया जा सकता है।

प्रश्न 5: क्या e₹ क्रिप्टो करेंसी है?

नहीं। e₹ RBI द्वारा जारी कानूनी निविदा है, जबकि क्रिप्टो करेंसी निजी और अनियमित (Unregulated) होती है।

Yuvraj Dixit

Yuvraj Dixit

टेक और डिजिटल संवाददाता
तकनीक (Tech) और गैजेट्स
युवराज तकनीक की दुनिया की हर हलचल पर पैनी नज़र रखते हैं। नए गैजेट्स से लेकर डिजिटल सिक्योरिटी तक, उनकी आसान भाषा में लिखी गई रिपोर्टें पाठकों को टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया समझने में मदद करती हैं।

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